जैन जगत के दादा गुरुदेव श्री जिनदत्तसूरि, मणिधारी दादा गुरुदेव श्री जिनचंद्रसूरि, दादा श्री जिनकुशलसुरि, दादा श्री जिनचंद्रसूरि, ये चार नाम उन महापुरुषों के, जिन्होंने अपनी साधना और पुरुषार्थ के आधार पर जैन शासन की दिशा ही बदल दी।
जैन समाज का हर घटक अपने अन्तर में इन चारों दादा गुरुदेवों के उपकारों के सुगंध का प्रतिफल अहसास करता है।
अपने-अपने समय में हर गच्छ में महान आचार्य बहुत हुए है, किंतु कोई ऐसा आचार्य नहीं, जो इनकी बराबरी कर सके।
यही कारण है कि इन चार महापुरुषों को ही दादा गुरुदेव का विशिष्ट और उपकार भरा संबोधन प्राप्त हुआ। यह संबोधन उन्होंने स्वयं नहीं लिया, न किसी राजा ने दिया, न किसी एक संघ या आचार्य ने दिया! यह संबोधन आम जनसमूह ने परम श्रद्धा से भरकर दिया।
~साहित्य वाचस्पति महोपाध्याय विनयसागरजी की पुस्तक "दादा गुरुदेव" से।
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